29 जून 2021 - 17:22
हम तो यही समझते हैं कि बाइडन ने इराक़-सीरिया सीमा पर ईरान समर्थित इराक़ी फ़ोर्सेज़ पर हमला करके बहुत बड़ी ग़लती कर दी, क्या हो सकता है इसका इंतेक़ाम?

सीरिया-इराक़ सीमा पर अगर अमरीकी युद्धक विमान इराक़ी पापुलर फ़ोर्स हश्दुश्शअबी के छह ठिकानों पर बमबारी करते हैं जिनमें चार इराक़ी सैनिक और कुछ सीरियाई बच्चे मारे जाते हैं तो इसका साफ़ साफ़ यह मतलब है कि अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन जिन्होंने इस हमले का हुक्म दिया, इन देशों से सैनिकों को बाहर निकालने का इरादा नहीं रखते।

बल्कि इराक़ और सीरिया में अस्थिरता का माहौल बाक़ी रखना चाहते हैं और वियेना में जारी परमाणु वार्ता को भी नाकाम कर देना चाहते हैं।

राष्ट्रपति बाइडन आग से खेल रहे हैं और साथ ही यह भी साबित कर रहे हैं कि इलाक़े में तेज़ी से बदलते हालात के बारे में पूरी गहराई से उन्हें जानकारी नहीं है। यह हमला जो इराक़ की संप्रभुता का उल्लंघन है उस समय हुआ जब बग़दाद में इराक़, मिस्र और जार्डन की शिखर बैठक हो रही थी। अब आने वाले दिनों में इराक़ में मौजूद 2500 अमरीकी सैनिकों को इस हमले का ख़मियाज़ा भुगतना पड़ेगा।

अमरीका के इस हमले के उल्टे नतीजे निकलेंगे। इन हमलों से सारे इराक़ियों के बीच यह सहमति और भी मज़बूत होगी कि वर्ष 2020 में संसद में पारित होने वाले प्रस्ताव के आधार पर इराक़ से अमरीकी सैनिकों को तत्काल बाहर निकाला जाए।

हश्दुश्शाबी ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा है कि इंतेक़ाम ज़रूर लिया जाएगा। हमें तो लगता है कि इंतेक़ाम के रूप में बग़दाद में अमरीकी दूतावास को निशाना बनाया जा सकता है। इसी तरह एनुल असद छावनी, अरबील एयरपोर्ट और सीरिया के भीतर तनफ़ मरुस्थल में अमरीकी सेना की छावनियों को भी निशाना बनाया जा सकता है।

कारण यह है कि हश्दुश्शाबी के पास इन छावनियों को निशाना बनाने की पूरी क्षमता मौजूद है।

अमरीकी नेताओं की मुश्किल यही है कि इतिहास से सबक़ नहीं लेते और मध्यपूर्व में मिलने वाली पराजय से पाठ नहीं लेना चाहते। राष्ट्रपति बाइडन जो ओबामा के शासन काल में उप राष्ट्रपति थे आज भूल गए हैं कि अमरीकी सेना को 2011 में इराक़ी फ़ोर्सेज़ के सामने हार मानते हुए इराक़ से बाहर निकलना पड़ा था। अफ़ग़ानिस्तान से उन्हें बिना किसी शर्त के अपने 3600 से अधिक सैनिकों को निकालना ही पड़ा है।

इराक़ और सीरिया से भी अमरीकी सेना को शिकस्त उठाकर बाहर निकलना पड़ेगा। इस प्रकार के हवाई हमलों से हशदुश्शाबी की इराक़ से अमरीकियों को बाहर निकालने की योजना पर और जल्दी अमल करने में मदद मिलेगी। अमरीका को जाना पड़ेगा और उसके घटक व सहयोगी हाथ मलते रह जाएंगे।

इराक़ तेज़ी से अपनी ताक़त हासिल कर रहा है और इस्लामी व अरब जगत में अपनी पोज़ीशन मज़बूत कर रहा है। बाइडन प्रशासन को इन हमलों की भारी क़ीमत चुकानी पड़ेगी।

स्रोतः रायुल यौम